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अपनी गलती को महसूस करना

अपनी गलती को महसूस करना "यदि आ भला चाहते हैं , तो भूल को महसूस करना , उसकी तरफ़ ध्यान दे कर उसे निकलना आपकी शान्ति और सुख चैन के लिए जरूरी हो जाता है ! अगर आप अपनी गलती महसूस नही करते तो फ़िर गलती पैर गलती होती रहती है ! गलती की कई परते जमा हो जाती है ! अगर आप महसूस कर लेते हो , तो गलती पलती नही, बल्कि पिघलती है ! महसूसता एक ऐसी ब्रेक है , जो गलती को आगे नही बढ़ने नही देती , इसलिये गलती को ठीक करने के लिए पहेला कदम है, गलती को महसूस कंरना

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