यूक्रेन में अमेरिका व nato की भूमिका

 यूक्रेन पर लगातार बमबारी व नरसंहार ज़ारी है ये मीडिया के द्वारा बताया जा रहा है और पूरा विश्व स्तब्ध है।कोई समझ नहीं पा रहा है कि ऐसा विध्वंस क्यों हो रहा है।आज ज़्यादातर लोग यूक्रेन के साथ खड़े दिख रहे है और इस स्थिति के लिये कौन जिमेवार है इसे नजरअंदाज किया जा रहा है।पुतिन एक खलनायक के तौर पर उभर चुके है जो इस समय सही भी है ,बूचा नरसंहार इसकी गवाही भी दे रहा है।विश्व के समूचे मीडिया तंत्र पर अमेरिका समर्थक देशों का एकाधिकार है वही पूरे विश्व में प्रचारित होता है।चाहे reuter हो बीबीसी हो एसोसिएटेड प्रेस हो या अन्य नाटो देशों की न्यूज़ ऐजेंसीयां यही विश्व को समाचार देती रहीं है और नियंत्रण करती है।बदलते वैज्ञानिक युग में सोशल मीडिया के आने से जनता तक कुछ सही पहुंच पा रहा है,पर फिर भी मीडिया अभी भी उनके नियंत्रण में है।अगर पिछले समय पर दृष्टि डालें तो पुतिन एक शक्तिशाली शासक के तौर पर उभरे है और उनके अधीन रूस ने तरक्की के झंडे गाड़े है।जो रूस सोवियत संघ के विघटन के बाद कंगाल सा हो गया था बहुत तेज़ी से पुनः शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में उभरा यही अमेरिका को नागवार गुज़र रहा था।अब कैसे उसे खोखला किया जाये ये अमेरिका विचार कर रहा था।यूक्रेन ने एक अवसर दिया और आज ये स्थिति बनी है।नाटो कुछ नहीं बल्कि अमेरिका की कठपुतली मात्र है।सभी जानते है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका बेताज बादशाह बनकर उभरा और उसकी रहनुमाई में जो संगठन बना वही नाटो है जो संगठन सोवियत संघ के अधीन वारसा पैक्ट के द्वारा बना वह दूसरा गुट था और शीत युद्ध शुरू हुआ था।दूसरे विश्व युद्ध के बाद जर्मनी इटली व जापान को अपराधी की श्रेणी में डाला था पर उन पर उस तरह का व्यवहार नहीं किया गया जैसा पहले विश्व युद्ध के बाद जर्मनी का किया था।वर्साय की शर्मनाक संधि ही दूसरे विश्व युद्ध का कारण बनी और हिटलर डिक्टेटर बन कर उभरा और भयानक विध्वंस हुआ।

 अमेरिका ने हिरोशिमा व नागासाकी पर अणु बम्ब गिराये भयानक नरसंहार हुआ पर उसको खलनायक कभी नहीं बताया गया।वियतनाम, इराक़ अफगानिस्तान सीरिया लीबिया नाइजीरिया ईरान न जाने कहाँ कहाँ अनावश्यक हस्तक्षेप किया विश्व कुछ नही बोला बल्कि अमेरिका को हीरो बन के इस मीडिया ने दिखाया।अमेरिका ने नाटो के साथ साथ सयुक्त राष्ट्र संघ का उपयोग अपने हितों को साधने के लिये किया विश्व चुप्पी साध के बैठा रहा।ये विश्व की तुष्टिकरण की एकतरफा नीति रही है सभी जानते है।इज़राइल के साथ हमेशा कौन खड़ा रहा सब जानते,पूरे विश्व में देशों के बीच तनाव बना रहे और अमेरिका तरक्की करता रहे इसी कारण विश्व तनावपूर्ण वातावरण में जी रहा है।शीत युद्ध की समाप्ति के बाद विश्व पर उसका एकाधिकार ही हो गया है और वह मनमाने कार्य करता रहता है।अब रूस के साथ चीन भी बड़ी ताकत के रुप में उभर रहा जो उसके एकछत्र सिंहासन को खतरे की घण्टी लग रही है।

  यूक्रेन जब रूस के आगे कुछ नहीं था तो उसे शांतिपूर्ण तरीके से विवादों को सुलझाने का प्रयास करना चाहिए था पर उसके कॉमेडियन शासनाध्यक्ष जेलेन्सकी ने उसे विनाश के मार्ग पर धकेल दिया।इस युद्व को उकसाने के लिये अमेरिका और उसका समर्थक नाटो भी काफी हद तक ज़िम्मेदार है क्यों क्योंकि उनके इशारे पर ही जेलेन्सकी बड़ी बड़ी बातें करके रूस को उकसाता रहा।अब आप देखें कि क्या अमेरिका व नाटो यूक्रेन के विध्वंस को बचा पाए बिल्कुल नहीं बल्कि वे आज भी रूस को उकसाने का काम करते रहे ताकि रूस विश्व में बदनाम हो जाये और वह आर्थिक व सामरिक दृष्टि से कमज़ोर हो जाये।उनकी चाल कामयाब हो गई और बलि का बकरा यूक्रेन बन रहा है।सदाम हुसैन के इराक़ पर आक्रमण जो रासायनिक हथियारों के कारण था जब वे नहीं मिले क्या अमेरिका युद्ध अपराधी बना विश्व के कोने कोने में नरसंहार कराये कभी अमेरिका और उसके समर्थक युद्ध अपराधी बने कदापि नही।अमेरिका रूस को कमजोर करके अपने उद्देश्य में सफल हो गया।इससे एक सबक तो सभी कमज़ोर राष्ट्र को लेना चाहिए कि कभी दूसरे के इशारों पर काम नहीं करना चाहिए और अपनी प्रभुसत्ता की रक्षा के लिये सामरिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करनाचाहिए।जिसने जो प्रचारित करना है करे मेरी दृष्टि से रूस के साथ साथ अमेरिका नाटो व संयुक्त राष्ट्र संघ इस युद्ध के लिए समान रूप में जिमेवार है।भारत को अपनी तटस्थता की नीति को नहीं त्यागना चाहिए क्योंकि रूस ने विश्व के हर मंच पर भारत का समर्थन किया है।भारत को सामरिक रूप से इतना ताकतवर होना चाहिए ताकि कोई शत्रु राष्ट्र हमारी प्रभुसत्ता को चुनौती न दे सके।युद्ध कभी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता पर पर्दे के पीछे की साजिशों को भी बेनकाब करना बेहद आवश्यक है।कभी किसी नेता की जेलेन्सकी नहीं बनना चाहिए जो अपनी प्रजा को विनाश की तरफ ले जाये।सभी को अमेरिका व उसके समर्थक मित्रदेशों की चालों को समझना होगा और विश्व को संयुक्त राष्ट्र संघ को कठपुतली संगठन से एक ताकतवर संगठन बनाना होगा।यूक्रेन का पुनर्निर्माण शीघ्र हो जायेगा लेकिन जिन लोगों ने अपनो को खोया है महान विध्वंस होते देखा कभी भुला नहीं भुला पायेंगे।रुस की  यदि ज़्यादा जिमेवारी है तो यूक्रेन अमेरिका व नाटो की भी कम नहीं।